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भक्तिकालीन सम्बन्ध में प्रमुख आलोचनात्मक कथन || hindi sahitya

दोस्तों आज की पोस्ट में भक्तिकालीन सम्बन्ध में प्रमुख आलोचनात्मक कथन दिए गए है जो परीक्षा के लिए काफी उपयोगी साबित होंगे भक्तिकालीन कवियों के सम्बन्ध में प्रमुख आलोचनात्मक कथन   ⇒कबीर तथा अन्य निर्गुण पंथी संतों के द्वारा अंतस्साधना में रागात्मिकता ’भक्ति’ और ज्ञान का योग तो हुआ है पर कर्म की दिशा वही

महावीर प्रसाद द्विवेदी

महावीर प्रसाद द्विवेदी (Mahavir Prasad Dwivedi)   दोस्तो आज की इस पोस्ट मे हम  महावीर प्रसाद द्विवेदी  जी के बारे मे विस्तार से जानेंगे  इसलिए (Therefore) आप इस पोस्ट को अच्छे से पढ़िएगा ⇒जन्मकाल – 1864 ई. ⇒ जन्मस्थान – ग्राम – दौलतपुर, जिला – रायबरेली (उ.प्र.) ⇒ मृत्युकाल – 21 दिसम्बर, 1938 ई. (रायबरेली में) ⇒ प्रमुख रचनाएँ –

हिन्दी रेखाचित्र

अंग्रेजी में ’स्केच का हिन्दी पर्याय ’रेखाचित्र’ है। ’स्केच’ की ही तरह ’रेखाचित्र’ में भी कम से कम शब्दों में कलात्मक ढंग से किसी वस्तु, व्यक्ति या दृश्य का अंकन किया जाता है। इसमे साधन शब्द होते है, रेखाएँ नहीं। इसीलिए इसे ’शब्दचित्र’ भी कहते हैं। ’रेखाचित्र’ यद्यपि एक नवीन साहित्यिक विधा के रूप में

NET JRF HINDI DECEMBER 2018 ANSWER KEY हिंदी टेस्ट सीरीज PDF NOTES

सभी हिंदी मित्रों का हमारे हिंदी साहित्य चैनल पर स्वागत  है व्हाट्सप ऑनलाइन HINDI SAHITY टेस्ट सीरीज का आयोजन 25 दिसंबर 2018से शुरू किया जाएगा ⇒page  के नीचे पूरी  जानकारी  पढे  दोस्तो आज 21 दिसम्बर  2018 हिन्दी विषय पेपर की  ANSWER KEY जल्द ही हमारे इस page पर जारी की जाएगी  जो हमारे हिन्दी साहित्य चैनल

कामायनी महत्वपूर्ण कथन

*कामायनी महाकाव्य के बारे में महत्तवपूर्ण कथन* ⚛कामायनी महाकाव्य -जय शंकर प्रसाद ⚛सर्ग – 15 ⚛मुख्य छंद – तोटक ⚛कामायनी पर प्रसाद को मंगलाप्रसाद पारितोषिक पुरस्कार मिला है ⚛काम गोत्र में जन्म लेने के कारण श्रद्धा को कामायनी कहा गया है। ⚛प्रसाद ने कामायनी में आदि मानव मनु की कथा के साथ साथ युगीन समस्याओं

आधुनिक काल के हिंदी साहित्यकार

19 वीं सदी में जन्में प्रमुख साहित्यकार ( जन्म के क्रम पर आधारित ) निम्न हैं – =================*==*===== 1. 1815-1881 – सेवक 2. 1826-1896 – राज लक्ष्मण सिंह 3. 1844-1914 – बालकृष्ण भट्ट 4. 1845-1884 – सरदार 5. 1850-1911 – सुधाकर द्विवेदी 6. 1850-1885 – भारतेंदु हरिश्चन्द्र 7. 1851-1887 – लाला श्रीनिवास दास 8. 1855-1923
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